Hindi Stories of Akbar Birbal | अकबर बीरबल के रोचक किस्से

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Hindi Stories of Akbar Birbal: आज की इस पोस्ट में “Best Akbar Birbal Story Hindi” में हम आपके साथ तीन अकबर बीरबल की कहानियां शेयर कर रहे है। उम्मीद करते है आपको ये Akbar Birbal Hindi Story पसंद आएगी।

Hindi Stories of Akbar Birbal
Hindi Stories of Akbar Birbal



बीरबल और तीन गुडि़यां (Best Akbar Birbal Story Hindi)

एक बार एक कलाकार तीन सुन्दर गुडि़यों को लेकर बादशाह अकबर के दरबार में आया। ये गुडि़यां बिल्कुल एक समान थी। उनमें इतनी समानता थी कि उनके बीच अंतर करना बहुत मुश्किल था। अकबर को गुडि़यां बहुत प्यारी लगी। उसने कहा, ”ये गुडि़यां मुझे बेच दो और मैं तुम्हें इनकी अच्छी कीमत दूंगा।“

कलाकार ने कहा, ”जहांपनाह! ये गुडि़यां बेचने के लिए नहीं हैं। बेशक मैं आपको ये उपहार के रूप में दे दूंगा यदि आपके दरबार में कोई यह बता दे कि तीनों में से अच्छी कौन सी है।“ यह एक अजीब पहेली थी। अकबर ने गुडि़यों को उठाया और करीब से देखा। किंतु तीनों गुडि़यों में इतनी समानता थी कि अकबर यह नहीं कह सका कि कौन सी अच्छी है। तब उसके प्रत्येक मंत्री ने इस पहेली को सुलझाने की कोशिश की, परंतु वे असफल रहे।

अकबर ने बीरबल को बुलाकर कहा, ”बीरबल तुम क्यों नहीं कोशिश करते। मुझे विश्वास है कि तुम इस पहेली को हल कर लोगे।“ बीरबल अकबर की ओर सम्मान से झुका और गुडि़यों के पास गया। उसने प्रत्येक गुडि़या को हाथ में उठाया और बड़ी बारीकी से उनको देखा। हर कोई आश्चर्यचकित था। उसने एक गुडि़या के कान में फूंक मारी। हवा उसके दूसरे कान से बाहर आ गई। फिर उसने दूसरी गुडि़या के कान में फृंक मारी, किंतु इस बार हवा उसके मुंह से निकली। जब बीरबल ने तीसरी गुडि़या के कान में फूंक मारी तो हवा कहीं से भी बाहर नहीं निकली।

बीरबल ने कहा, ”जहांपनाह! यह तीसरी गुडि़या ही इन तीनों में सबसे अच्छी है।“ अकबर हैरान हो गया। उसने कहा, ”तुमने यह कैसे जान लिया?“

बीरबल ने कहा, ”मेरे मालिक! यह तीनों गुडि़यां तीन व्यक्तियों की तरह हैं। जब मैंने पहली गुडि़या के कान में फूंक मारी, तो यह दूसरे कान से बाहर आ गई। ऐसे ही जब हम एक रहस्य किसी दूसरे व्यक्ति को बताते हैं तो वह अगले ही पल उसे भूल जाता है।

जब मैंने दूसरी गुडि़या के कान में फूंक मारी, तो वह उसके मुंह से बाहर निकल गयी। ऐसे ही कुछ व्यक्ति जो कुछ सुनते हैं, उसे शीघ्र ही दूसरे व्यक्ति को बता देते हैं। ऐसे व्यक्ति कभी रहस्य को छुपाकर नहीं रख सकते। किंतु जब तीसरी गुडि़या के कान में फूंक मारी, तो हवा कहीं से भी बाहर नहीं आई। इस तरह के व्यक्ति अच्छे होते हैं, जो रहस्य को छुपाकर रखते हैं। आप इन्हें कोई भी रहस्य की बात बता सकते हैं।“

कलाकार ने कहा, ”मैंने अभी तक केवल बीरबल के ज्ञान के बारे में सुना था, किन्तु आज मैंने इसे देख भी लिया। जहांपनाह, ये गुडि़यां आपकी हैं।“

अकबर ने कहा उसे बीरबल पर बहुत गर्व है।



तीन सवाल (Hindi Akbar Birbal Story)

एक बार सभी दरबारी, बीरबल एवं राजा अकबर दरबार मे बैठे थे | सभी लोग दरबार के अलग अलग पदो एवं मंत्री पदो के बारे मे विचार विमर्श कर रहे थे | उनमें से एक मंत्री, जो महामंत्री का पद पाना चाहता था। उसने मन ही मन एक योजना बनाई। उसे मालूम था कि बीरबल उससे ज्यादा बुद्धिमान था, लेकिन फिर भी वह मुख्य सलाहकार का पद पाना चाहता था। 

एक दिन दरबार में अकबर ने बीरबल की बहुत तारीफ की। यह सब सुनकर उस मंत्री को बहुत गुस्सा आया। उसने महाराज से कहा कि यदि बीरबल मेरे तीन सवालों का उत्तर सही-सही दे देता है तो मैं उसकी बुद्धिमता को स्वीकार कर लूंगा। यदि नहीं तो इससे यह सिद्ध होता है कि वह आपका चापलूस है। अकबर को मालूम था कि बीरबल उसके सवालों का जवाब जरूर दे देगा इसलिए उन्होंने उस मंत्री की बात मान ली।

उस मंत्री के तीन सवाल थे –

1. आकाश में कितने तारे हैं?

2. धरती का केन्द्र कहां है?

3. सारे संसार में कितने स्त्री और कितने पुरूष हैं?

अकबर ने बीरबल पर भरोसा जताते हुए। उसे इन सवालों के जवाब देने के लिए कहा और साथ ही यह शर्त रखी कि यदि वह इनका उत्तर नहीं जानता है तो मुख्य सलाहकार का पद छोड़ने के लिए तैयार रहे।

बीरबल ने कहा- बादशाह सलामत मैं इन प्रश्नों के उत्तर जानता हूं, सुनिए।

पहले सवाल का जवाब- बीरबल ने एक भेड़ मंगवाई और कहा जितने बाल इस भेड़ के शरीर पर हैं। आकाश में उतने ही तारे हैं। उन्होंने उस मंत्री की ओर देख कर कहा आप गिनकर तसल्ली कर लो।

दूसरा सवाल का जवाब – बीरबल ने ज़मीन पर कुछ लकीरें खिंची और कुछ हिसाब लगाया। फिर एक लोहे की छड़ मंगवाई। उसे एक जगह गाड़ दिया और बीरबल ने बादशाह से कहा – बादशाह बिल्कुल इसी जगह धरती का केन्द्र है, चाहें तो आप खुद जांच लें। बादशाह बोले ठीक है अब तीसरे सवाल के बारे में कहो।

तीसरे सवाल का जवाब- बीरबल ने कहा अब जहांपनाह तीसरे सवाल का जवाब बड़ा मुश्किल है, क्योंकि इस दुनिया में कुछ लोग ऐसे हैं जो ना तो स्त्री की श्रेणी में आते हैं, ना ही पुरुषों की श्रेणी में। उनमें से कुछ लोग तो हमारे दरबार में भी हैं, जैसे कि ये मंत्री जी। महाराज यदि आप इनको मौत के घाट उतरवा दें तो मैं स्त्री-पुरूष की सही-सही संख्या बता सकता हूं।

अब मंत्रीजी सवालों का जवाब छोड़कर थर-थर कांपने लगे और महाराज से बोले,”महाराज बस-बस मुझे मेरे सवालों का जवाब मिल गया। मैं बीरबल की बुद्धिमानी को मान गया हूं। महाराज हमेशा की तरह बीरबल की तरफ पीठ करके हंसने लगे और इसी बीच वह मंत्री दरबार से भाग गया।

शिक्षा: कभी किसी परीक्षा से घबराएं नहीं, जो सवाल जितने अजीब होते हैं, उनके जवाब भी उसी तरह दिए जा सकते हैं। अगर दिमाग को शांत और सक्रिय रखा जाए तो हम किसी भी सवाल का जवाब दे सकते हैं। 



सही और गलत का अंतर (Akbar Birbal Story in Hindi)

एक दिन बादशाह अकबर ने सोचा, हम रोज़ रोज़ न्याय करते हैं। उसके लिय हमे सही और गलत का पता लगाना पड़ता है। लकिन सही और गलत के बीच आखिर अंतर क्या होता है?

दूसरे दिन बादशाह अकबर ने दरबारियों से पूछा। दरबारी इस प्रश्न का क्या जवाब देते। वे एक दूसरे कि शक्ल देखने लगे। बादशाह समझ गए कि किसी के पास इस सवाल का जवाब नहीं है। इसलिय उन्होने बीरबल से पूछा “तुम्ही बताओ, सही और गलत मे कितना अंतर है?”

बीरबल तपाक से बोले- “चार उंगल का, जहाँपनाह।”

बादशाह चौके। वह तो समझे थे कि इस सवाल का कोई जवाब नहीं हो सकता। इसलिए बीरबल का जवाब सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होने कहा, “बीरबल। खुलकर बताओ।”

“जहाँपनाह! आँख और कान के बीच चार उंगल का अंतर है। यही सही-गलत के बीच कि दूरी है। आप जिसे अपनी आँखों से देखते है, वह सही है। जिसे अपने कानो से सुनते हैं वह गलत भी हो सकता है। इसलिए सही और गलत के बीच चार उंगल का अंतर माना जायेगा।”

यह सुनकर बादशाह अकबर बोले- “वाह! बीरबल वाह! तुम्हारी बुद्धि और चतुराई का कोई जवाब नहीं।”

शिक्षा: सत्य जो कि अवलोकन और सुनी हुई बातों द्वारा प्राप्त होता है उसमे अंतर करना आवश्यक है। लकिन हम सोचते हैं कि जो भी देखा गया है वह सच है और विश्वसनीय है। 


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धन्यवाद

Image Credit:- Canva


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