होली पर कविताएं 2022 | Holi Poems In Hindi | Holi Par Kavita

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Holi Poems In Hindi: आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं। आज के इस लेख में मैं आपके साथ होली की मशहूर कविताएं शेयर करने जा रही हूँ। ये होली की कविताएँ बच्चे अपने विद्यालय में होली के शुभ अवसर पर सुना सकते है। यह होली की कविताएँ आपके दिलों को छू जाएगी।

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Holi Poems In Hindi
Holi Poems In Hindi

होली पर कविताएं | Holi Poems in Hindi

रंग रंगीली आई होली – सीमा सचदेव

नन्ही गुड़िया माँ से बोली
माँ मुझको पिचकारी ले दो

इक छोटी सी लारी ले दो
रंग-बिरंगे रंग भी ले दो

उन रंगों में पानी भर दो
मैं भी सबको रग डालूँगी
रंगों के संग मज़े करूँगी
मैं तो लारी में बैठूँगी
अन्दर से गुलाल फेंकूँगी

माँ ने गुड़िया को समझाया
और प्यार से यह बतलाया
तुम दूसरो पे रंग फेंकोगी
और अपने ही लिए डरोगी

रँग नहीं मिलते है अच्छे
हुए बीमार जो इससे बच्चे

तो क्या तुमको अच्छा लगेगा
जो तुम सँग कोई न खेलेगा
जाओ तुम बगिया मे जाओ
रंग- बिरंगे फूल ले आओ
बनाएँगे हम फूलों के रन्ग

फिर खेलना तुम सबके संग
रंगों पे खरचोगी पैसे
जोड़े तुमने जैसे तैसे

उसका कोई उपयोग न होगा
उलटे यह नुकसान ही होगा
चलो अनाथालय में जाएँ
भूखे बच्चों को खिलाएँ

आओ उन संग खेले होली
वो भी तेरे है हमजोली
जो उन संग खुशियाँ बाँटोगी
कितना बड़ा उपकार करोगी
भूखा पेट भरोगी उनका
दुनिया में नहीं कोई जिनका

वो भी प्यारे-प्यारे बच्चे
नन्हे से है दिल के सच्चे
अब गुड़िया को समझ में आई
उसने भी तरकीब लगाई
बुलाएगी सारी सखी सहेली
नहीं जाएगी वो अकेली

उसने सब सखियों को बुलाया
और उन्हें भी यह समझाया
सबने मिलके रंग बनाया
बच्चों सँग त्योहार मनाया

भूखों को खाना भी खिलाया
उनका पैसा काम में आया
सबने मिलकर खेली होली
और सारे बन गए हमजोली..!



मुट्ठी में है लाल गुलाल – प्रभुदयाल श्रीवास्तव

नोमू का मुंह पुता लाल से
सोमू की पीली गुलाल से
कुर्ता भीगा राम रतन का,
रम्मी के हैं गीले बाल।
मुट्ठी में है लाल गुलाल।।

चुनियां को मुनियां ने पकड़ा
नीला रंग गालों पर चुपड़ा
इतना रगड़ा जोर-जोर से,
फूल गए हैं दोनों गाल।
मुट्ठी में है लाल गुलाल।।

लल्लू पीला रंग ले आया
कल्लू ने भी हरा रंग उड़ाया
रंग लगाया एक-दूजे को,
लड़े-भिड़े थे परकी साल।
मुट्ठी में है लाल गुलाल।।

कुछ के हाथों में पिचकारी
गुब्बारों की मारा-मारी।
रंग-बिरंगे सबके कपड़े,
रंग-रंगीले सबके भाल।
मुट्ठी में है लाल गुलाल।।

इन्द्रधनुष धरती पर उतरा
रंगा, रंग से कतरा-कतरा
नाच रहे हैं सब मस्ती में,
बहुत मजा आया इस साल।
मुट्ठी में है लाल गुलाल।।



रंग बरसत ब्रज में होरी का शिवदीन राम जोशी

रंग बरसत ब्रज में होरी का |
बरसाने की मस्त गुजरिया, नखरा वृषभानु किशोरी का ||
गुवाल बाल नन्दलाल अनुठा, वादा करे सब से झूठा |
माखन चोर रसिक मन मोहन, रूप निहारत गौरी का ||
मारत हैं पिचकारी कान्हा, धूम माचवे और दीवाना |
चंग बजा कर रंग उडावे, काम करें बरजोरी का ||
ब्रज जन मस्त मस्त मस्ताना, नांचे कूदे गावे गाना |
नन्द महर घर आनंद छाया, खुल गए फाटक मोरी का ||
कहे शिवदीन सगुण सोही निरगुण, परमानन्द होगया सुण-सुण |
नांचै नृत्य धुन धमाल, देखो अहीरों की छोरी का ||



होली पर हिंदी कविता हरिवंशराय बच्चन

यह मिट्टी की चतुराई है,
रूप अलग और रंग अलग,
भाव, विचार, तरंग अलग हैं,
ढाल अलग है ढंग अलग,

आजादी है जिसको चाहो आज उसे वर लो।
होली है तो आज अपरिचित से परिचय कर को!

निकट हुए तो बनो निकटतर
और निकटतम भी जाओ,
रूढ़ि-रीति के और नीति के
शासन से मत घबराओ,

आज नहीं बरजेगा कोई, मनचाही कर लो।
होली है तो आज मित्र को पलकों में धर लो!

प्रेम चिरंतन मूल जगत का,
वैर-घृणा भूलें क्षण की,
भूल-चूक लेनी-देनी में
सदा सफलता जीवन की,

जो हो गया बिराना उसको फिर अपना कर लो।
होली है तो आज शत्रु को बाहों में भर लो!

होली है तो आज अपरिचित से परिचय कर लो,
होली है तो आज मित्र को पलकों में धर लो,
भूल शूल से भरे वर्ष के वैर-विरोधों को,
होली है तो आज शत्रु को बाहों में भर लो!



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होली का आया त्यौहार / रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’


प्राची गुझिया बना रही है,
दादी पूड़ी बेल रही है ।
कभी-कभी पिचकारी लेकर,
रंगों से वह खेल रही है ।।

तलने की आशा में आतुर
गुझियों की है लगी कतार ।
घर-घर में खुशियाँ उतरी हैं,
होली का आया त्यौहार ।।

मम्मी जी दे दो खाने को,
गुझिया-मठरी का उपहार ।
सजता प्राची के नयनों में,
मिष्ठानों का मधु-संसार ।।

सजे-धजे हैं बहुत शान से
मीठे-मीठे शक्करपारे ।
कोई पीला, कोई गुलाबी,
आँखों को ये लगते प्यारे ।।

होली का अवकाश पड़ गया,
दही-बड़े कल बन जाएँगे ।
चटकारे ले-लेकर इनको,
बड़े मज़े से हम खायेंगे ।।


मैं उम्मीद करती हूँ कि, आपको ये होली की कविताएं पढ़कर आनंद आया होगा। तो देरी न कीजिए इन holi poems को फेसबुक, ट्विटर पर जल्दी शेयर कीजिये।


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